Wednesday, November 28, 2018
मेरे एहसास
नाराज क्यों होऊ मैं तुझसे,अगर तू साथ ना है।
अगर जीना ही जिंदगी है,तो खुश हूं मैं इस जिंदगी से, तेरे बगैर।
Tuesday, November 20, 2018
मेरे एहसास
महसूस करने लगा हूं खुद में तुझे, तुझे क्यों मैं याद दिलाऊं।
ढूंढो तो कहां ढूंढू तुझे,अपने दिल में ही तुझे पाऊं।
कहने दो जमाने को पागल मुझे,मैं तो बस तेरी यादों में ही मुस्कुराऊं।
Monday, November 5, 2018
मेरे एहसास
ना जाने क्यों वक्त छूट सा गया है,
होठों की मुस्कान भी अब,रूठ सा गया है।
टूटा तो अंदर कुछ भी नहीं, पर ना जाने क्यों,दिल रुठ सा गया ।
शायद यह हकीकत ही है कि,अब वक्त छुट सा गया है ।
अब जगा करती रातों, मेरी आंखें
,शायद मालूम है,इन आंखों को,की ये रिश्ता टूट सा गया है।
Sunday, November 4, 2018
मेरे एहसास
कभी एहसासों में,अगर मैं प्यार बन जाऊं, तो आँखों से अश्क ना बहाना, तेरी दर्द की एहसास मुझे, तुझसे ज्यादा मुझे रुलाएगी।
Sunday, October 28, 2018
Dialogue
एहसास हू मैं, एहसास ही रहने दो, फिजूल की अल्फाजों में क्यों पड़ती हो तुम,जिसे लोग मोहब्बत कहते हैं ।
मेरे एहसास
वक्त का क्या पता,कब गुजर जाए,एक एहसास मेरे दिल में भी रह लेने दो, कि अफसोस ना हो, कि अब तुम कुछ भी नहीं ।
मेरे एहसास
अगर मोहब्बत ही थी,मेरे दिल में, तो फिर तन्हा कैसे हुआ।ख्याल तब आया, जब मुस्कुरा कर उनके दर आया।
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