Monday, November 5, 2018

मेरे एहसास

ना जाने क्यों वक्त छूट सा गया है, होठों की मुस्कान भी अब,रूठ सा गया है। टूटा तो अंदर कुछ भी नहीं, पर ना जाने क्यों,दिल रुठ सा गया । शायद यह हकीकत ही है कि,अब वक्त छुट सा गया है । अब जगा करती रातों, मेरी आंखें ,शायद मालूम है,इन आंखों को,की ये रिश्ता टूट सा गया है।

Sunday, November 4, 2018

मेरे एहसास

कभी एहसासों में,अगर मैं प्यार बन जाऊं, तो आँखों से अश्क ना बहाना, तेरी दर्द की एहसास मुझे, तुझसे ज्यादा मुझे रुलाएगी।

Sunday, October 28, 2018

Dialogue

एहसास हू मैं, एहसास ही रहने दो, फिजूल की अल्फाजों में क्यों पड़ती हो तुम,जिसे लोग मोहब्बत कहते हैं ।

मेरे एहसास

वक्त का क्या पता,कब गुजर जाए,एक एहसास मेरे दिल में भी रह लेने दो, कि अफसोस ना हो, कि अब तुम कुछ भी नहीं ।

मेरे एहसास

अगर मोहब्बत ही थी,मेरे दिल में, तो फिर तन्हा कैसे हुआ।ख्याल तब आया, जब मुस्कुरा कर उनके दर आया।

Dialogue

दीखती रही मौत का समुंदर,फिर भी मैं हंसता रहा । जाता भी तो कहां जाता, समुंदर के बीच में जो खड़ा था ।

Saturday, October 27, 2018

मेरे एहसास

टूटा नहीं हूं मैं, मुस्कान अपने साथ रखा हूं, नजर से तुम देखो या ना देखो, तेरे हर मुस्कान को अपने साथ रख हूं मैं। रूठ जाने दो जमाने को, अपने होठों से तेरा ही नाम रटता हूं मैं।